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योगी सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार टला, बुधवार के बाद ले सकते हैं शपथ आधा दर्जन से अधिक मंत्री

लखनऊ । उत्तर प्रदेश की करीब ढाई वर्ष पुरानी योगी आदित्यनाथ सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी अंतिम दौर में थी, लेकिन अचानक इसे टाल दिया गया। सोमवार सुबह 11 बजे होने वाले मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर राजभवन में तैयारियां शुरू हो गई थीं। राजभवन में आधा दर्जन से अधिक मंत्रियों को पद तथा गोपनियता की शपथ दिलाई जानी थी। सोमवार की सुबह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह सपा और कांग्रेस छोड़कर आने वाले राज्यसभा के पूर्व सांसदों को लेकर मुख्यमंत्री से मिलाने उनके पांच कालिदास मार्ग स्थित आवास पर गए थे। इस दौरान योगी और स्वतंत्रदेव के बीच मंत्रिमंडल विस्तार पर भी अंतिम चर्चा हुई और इसके बाद तैयारी शुरू हो गई। बड़ी संख्या में विधायकों और मंत्रियों को राजधानी में रविवार रात तक पहुंचने के निर्देश भी दे दिये गए। हालांकि राजभवन में देर रात तक अधिकृत रूप से कोई जानकारी नहीं दी गयी थी।

सूत्रों का कहना है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के गंभीर रूप से बीमार होने की वजह से मंत्रिमंडल का विस्तार टाल दिया गया है। सोमवार को दोपहर बाद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को दिल्ली जाना है और उनकी वापसी दो दिन बाद होनी है। ऐसे में अब मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना बुधवार के बाद ही है। मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किये जाने वाले संभावित नामों को लेकर खूब अटकलें चलती रहीं। सर्वाधिक परेशान उन मंत्रियों के समर्थकों को देखा गया जिनके हटाये जाने की चर्चा चल रही है।  सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह के दिल्ली दौरे के बाद से ही इस बात की अटकलें काफी थीं। इसी बीच शनिवार को सीएम योगी आदित्यनाथ के गवर्नर आनंदीबेन पटेल की साथ मुलाकात के बाद इसको और बल मिल गया। योगी आदित्यनाथ सरकार में अभी 43 मंत्री हैं, उत्तर प्रदेश में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसको देखते हुए अभी भी एक दर्जन मंत्री बनाए जाने की गुंजाइश है।  भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ ही कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने योगी आदित्यनाथ तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने साथ बैठक के बाद इस मंत्रिमंडल का विस्तार को हरी झंडी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल के विस्तार का रास्ता साफ हो गया है। मंत्रिमंडल के विस्तार में आधा दर्जन से अधिक मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना जताई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बीच सभी कैबिनेट मंत्रियों से राजधानी लखनऊ में रहने के लिए कहा है।

सांसद बन चुके हैं तीन मंत्री, एक का इस्तीफा मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें बेवजह भी नहीं। सीटों के अनुपात में योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या 60 तक हो सकती है। योगी मंत्रिमंडल में 47 मंत्री थे, जिनमें से तीन रीता बहुगुणा जोशी, डॉक्टर एसपी सिंह बघेल और सत्यदेव पचौरी सांसद निर्वाचित होने के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2019 में योगी कैबिनेट में मंत्री रहीं रीता बहुगुणा जोशी ने इलाहाबाद संसदीय सीट पर जीत दर्ज की थी। कानपुर से सत्यदेव पचौरी और आगरा से एसपी सिंह बघेल जीतकर संसद पहुंचे हैं। इन तीनों मंत्रियों ने लोकसभा चुनाव जीतने के बाद योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर भी योगी मंत्रिमंडल से बाहर हो चुके हैं।

संतुलन बनाने का प्रयास पहले मंत्रिमंडल विस्तार में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले विधायकों को विशेष तरजीह दी जाएगी। पूर्वांचल से भी दो नाम शामिल किए जा सकते है। पश्चिम यूपी से भाजपा संगठन के बड़े नेता और एमएलसी अशोक कटारिया के नाम की चर्चा जोरों पर हैं। इसके साथ ही योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में नए चेहरे शामिल होंगे और कुछ मंत्रियों की छुट्टी होगी। इसके साथ ही कई मंत्रियों के विभाग भी बदले जाएंगे।

चेहरे के नाम व मंत्रालय आवंटन पर विचार यूं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एम्स में भर्ती भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली को देखने के लिए शुक्रवार को दिल्ली गए थे, लेकिन अमित शाह से उनकी मुलाकात के बाद सूबे में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के साथ भाजपा प्रदेशाध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के दिल्ली जाने और भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल के पहले से वहां मौजूद रहने से इस चर्चा को और बल मिला। चर्चा है शाह से मुलाकात के दौरान मंत्रिमंडल में शामिल किये जाने वाले चेहरों और विभागों के आवंटन पर विमर्श हुआ। दिल्ली से वापसी के बाद मुख्यमंत्री शनिवार शाम पांच बजे राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंचे। योगी आदित्यनाथ व आनंदीबेन की मुलाकात लगभग आधे घंटे की रही। योगी आदित्यनाथ की पहले अमित शाह और फिर आनंदीबेन से मुलाकात के बाद माना जा रहा हैै कि अब कभी भी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। रविवार को मुख्यमंत्री गोरखपुर में हैं इसलिए मंत्रिमंडल का विस्तार अगले सप्ताह में किसी भी दिन होने की प्रबल संभावना है।

अरसे से चल रही हैं चर्चाएं मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं तो अरसे से चल रही हैं लेकिन, लोकसभा चुनाव में सरकार के तीन मंत्रियों के सांसद चुने जाने और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर की बर्खास्तगी के बाद इसे लेकर कयास तेज हो गए थे। परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वतंत्र देव सिंह को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बनाने से उनका मंत्री पद छोडऩा भी तय है। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में मंत्रिमंडल विस्तार के लिए यह समय उपयुक्त माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद सीट से रीता बहुगुणा जोशी, कानपुर से सत्यदेव पचौरी और आगरा से एसपी सिंह बघेल ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद तीनों नेताओं ने योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा ओम प्रकाश राजभर भी सरकार का साथ छोड़ चुके हैं। चारों मंत्रियों के विभाग दूसरे सहयोगी मंत्री संभाल रहे हैं।

जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने पर जोर मंत्रिमंडल विस्तार के जरिये जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने पर जोर होगा। सरकार में पूर्वांचल और बुंदेलखंड की नुमाइंदगी बढऩे के आसार हैं। सांसद बनने वाले तीन मंत्रियों में से दो ब्राह्मण और एक दलित हैं। मंत्रिमंडल में होने वाले समायोजन में इस तथ्य पर भी गौर होगा। राजभर की सरकार से बर्खास्तगी की भरपाई स्वतंत्र प्रभार के मंत्री अनिल राजभर को कैबिनेट मंत्री बनाकर की जा सकती है। राज्य सरकार में गुर्जर समाज का अभी कोई मंत्री नहीं है। मंत्रिमंडल विस्तार में गुर्जर समाज को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। मंत्री पद के लिए गुर्जर समाज से एमएलसी अशोक कटारिया और एमएलए तेजपाल नागर के नाम चर्चा में हैं। अनुसूचित जाति के कोटे में एमएलसी विद्यासागर सोनकर का नाम सबसे आगे है। इनके अलावा दिनेश खटिक, दल बहादुर, श्रीराम चौहान और विजयपाल में से भी किसी को मौका मिल सकता है। लोकसभा चुनाव में हाथरस से धोबी बिरादरी के सांसद राजेश दिवाकर का टिकट कटा था। धोबी समाज को भी सरकार में प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। वहीं अगड़ी जातियों में एमएलसी विजय बहादुर पाठक और यशवंत सिंह समेत कुछ नाम चर्चा में हैं। स्वतंत्र प्रभार के मंत्रियों में डॉ.महेंद्र सिंह को प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। जिन मंत्रियों के काम से मुख्यमंत्री असंतुष्ट हैं, उन्हें अपेक्षाकृत कम महत्व वाले विभाग सौंपे जा सकते हैं।

कई मंत्रियों के बदले जा सकते हैं विभाग, कई की छुट्टी विभाग बदलने वाले मंत्रियों की सूची में मंत्री धर्मपाल सिंह और अनुपमा जायसवाल का नाम शामिल है। वहीं चर्चा है कि स्वाति सिंह की छुट्टी हो सकती है। इसके साथ ही नंद गोपाल नंदी का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है। भ्रष्टाचार में शामिल कई मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।

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